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जिला नरसिंहपुर एक नजर में


                    नरसिंहपुर जिला मध्यप्रदेश के हृदय स्थल में स्थित है। इसका इतिहास समृद्वशाली एवं भूमि उर्वर है । जिले में नर्मदा घाटी का एक भाग सम्मिलित है, इसके उत्तर में विन्धयाचल एवं दक्षिण में सतपुड़ा की सघन पर्वत श्रेणिया हैं।


                    यह जिला 22.45 उत्तर और 23.15 उत्तर अक्षांश तथा 78.38 पूर्व और 79.38 पूर्व देशांश के मध्य स्थित है। मध्यप्रदेश के पूर्नगठन के समय 1 नवम्बर 1956 से यह जिला अस्तित्व में आया है। जिले का कुल क्षेत्रफल 5133 वर्ग किलोमीटर है।


                    इस जिले में 1077 ग्राम जिनमें 1040 आबाद ग्राम 12 वन ग्राम तथा 457 ग्राम पंचायतें एवं 6 जनपद पंचायतें कार्यरत हैं । जिले में 2 नगर पंचायत एवं 2 नगर पालिकायें कार्यरत हैं। जिले को 5 तहसीलों 3 अनुभाग में प्रशासनिक दृष्टि से बांटा गया है।


                    वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल जनसंखया 9 लाख 57 हजार 399 है। इस दृष्टि से जिले का प्रदेश में 37 वां स्थान है। जिले की कुल जनसंखया में 5 लाख 01 हजार 407 पुरूष एवं 4 लाख 55 हजार 992 महिलायें है। जिले में गरीबी रेखा सर्वे 2002 के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के कट ऑफमार्क्स 14 के अंतर्गत अंनतिम सूची का प्रकाशन किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति के 16921, अनुसूचित जन जाति 12781, अन्य पिछडद्द्वा वर्ग 31814, तथा सामान्य 4705 कुल मिलाकर 66221 बी.पी.एल. परिवार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करतें हैं। जिले की 15 प्रतिशत आबादी नगरों में तथा 85 प्रतिशत ग्रामों में निवास करती है। कुल जनसंखया में 17 प्रतिशत अनुसूचित जाति तथा 13 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति निवासित है। जिले में जनसंखया का घनत्व 187 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है जो प्रदेश के 196 व्यक्ति प्रति किलोमीटर से कम है। जिले की कुल जनसंखया में 40 प्रतिशत कार्यशील हैं जिनमें से 36 प्रतिशत कृषक, 35 प्रतिशत कृषि मजदूर और 29 प्रतिशतअन्य कार्यशील है।


                    जिले में 1 लाख 36 हजार हेक्टेयर भूमि वन से आच्छादित है जो कि कुल क्षेत्रफल में से 26 प्रतिशत है। जिले में कुल कृषि जोत क्षेत्र 4 लाख 13 हजार 863 हेक्टेयर है। जिले में 1 लाख 13 हजार 621 हेक्टेयर में सोयाबीन, 1 लाख 25 हजार 591 हेक्टेयर चना तथा 77 हजार 338 हेक्टेयर एवं 12 हजार 332 हेक्टेयर में गन्ना तथा 84 हजार 981 हेक्टेयर क्षेत्र में अन्य फसलों का उत्पादन किया जाता है।


                    जिले में पवित्र सलिलानर्मदा एवं उसकी सहायक नदियां क्र मशः शेढ़, सीतारेवा, शक्कर, उमर एवं दुधी जिले को वरदान स्वरूप प्राप्त है। इसके साथ ही निजी जल-स्रोत नल-कूल एवं कुऐं भी सिंचवाई के उपलब्ध हैं जिले में कुल सिंचित क्षेत्र 1 लाख 69 हजार 415 हेक्टेयर है।


                    जिले के समस्त 1040 आबाद ग्रामों का विद्वुतीकरण किया जा चुका है। जिले में 30 हजार 635 विद्वुत पंप उर्जीकृत हैं। बिजली के कुल उपयोग का 71.77 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग किया जा रहा है।


                    जिले में आवागमन हेतु 142 किलोमीटर डामरीकृत सड़कें तथा 84.78 किलोमीटर गिट्‌टीकृत और 24.85 किलोमीटर अन्य जिला मार्ग यातायात के लिए उपलब्ध है।


                    शिक्षा के क्षेत्र में जिला अग्रणी है। जिले में 958 शासकीय प्राथमिक शालाऐं एवं 77 अशासकीय प्राथमिक शालाऐं हैं। इसी प्रकार 326 शासकीय एवं 32 अशासकीय माध्यमिक शालाऍ संचालित है। उच्चतर माध्यमिक शालाओं की संखया 76 शासकीय एवं33 अशासकीय शालाऍ है।


                    जिले में प्राथमिक शालाओं में 1 लाख 3 हजार 829 छात्र अध्ययनत है। माध्यमिक शालाओं में 44 हजार 345 छात्र एवं उत्तर माध्यमिक शालाओं में 25 हजार 334विधार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहेंहैं।


                    जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला मुखयालय पर जिला चिकित्सालय के अतिरिक्त गाडरवारा में चिकित्सालय एवं 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और 144 उप-स्वास्थ्य केन्द्र कार्यरत है।


                    सन 1782 में जाट सरदार द्वारा विशाल नरसिंह मंदिर का निर्माण कराया गया था । मंदिर के समीप ही एक विशाल तालाब भी है। नरसिंह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर के लिये प्रसिद्व है। नरसिंह मंदिर में भगवान नरसिंह की संगमरमर से निर्मित मूर्ति है जिसमें हिरण्यकश्यप का वध करते हुए स्थापित है। आसपास छह अन्य देवी-देवताओं की भी मूर्तिया हैं इस प्रकार कुल सात मूर्तियॉ हैं। इसी मंदिर में भगवान शिव का भी मंदिर है। मंदिर के नीचे एक तहघर भी है। इसी मंदिर के कारण जिला मुखयालय का नामकरण नरसिंहपुर पड़ा।